सहभागिता करें

हमारे साथ स्वयंसेवा करें

स्वयंसेवा

“स्वयंसेवा वह दीपक है, जो दूसरों के जीवन को रोशन करते हुए स्वयं भी प्रज्ज्वलित रहता है।”

आइए, अपने समय और प्रतिभा को लगाकर आदिवासी समुदायों का भविष्य बेहतर बनाने में सहभागी बनें!

स्वयंसेवा के माध्यम से सहयोग के मुख्य बिंदु

शिक्षा में सहयोग

आदिवासी बच्चों को पढ़ाने या विद्यालय प्रबंधन में भागीदारी।

स्वास्थ्य व पोषण

स्वास्थ्य शिविरों में मदद व पोषण कार्यक्रमों का क्रियान्वयन।

कौशल विकास

युवाओं को हुनर सिखाने हेतु वर्कशॉप या ट्रेनिंग देना।

पर्यावरण संरक्षण

वृक्षारोपण और वन्यजीव संरक्षण अभियानों में सक्रिय सहयोग।

हस्तशिल्प व संस्कृति

स्थानीय कला व संस्कृति को प्रोत्साहन और बाजार उपलब्ध करवाने में मदद।

दान करें

आपका छोटा-सा सहयोग आज एक बीज के समान है, जो आदिवासी कल्याण का विशाल वटवृक्ष बनकर कल हरा-भरा होगा।

दान का मुख्य उद्देश्य

1. शिक्षा का विस्तार

आदिवासी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, इसके लिए नए स्कूल खोलना व पुराने स्कूलों को सुदृढ़ करना।

2. छात्रवृत्ति कार्यक्रम

आर्थिक रूप से कमजोर व होनहार छात्रों को ऊँची शिक्षा के अवसर प्रदान करना।

3. स्वास्थ्य सेवाएँ

स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, आवश्यक दवाइयों व चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना।

4. पोषण व आहार सुरक्षा

कुपोषण से बचाने के लिए पोषण कार्यक्रम, भोजन वितरण एवं स्वच्छ पेयजल का प्रबंध।

5. कौशल विकास व रोजगार

प्रशिक्षण कार्यशालाओं द्वारा आदिवासी युवाओं को स्वरोज़गार व रोज़गार के अवसर प्रदान करना।

5. कौशल विकास व रोजगार

प्रशिक्षण कार्यशालाओं द्वारा आदिवासी युवाओं को स्वरोज़गार व रोज़गार के अवसर प्रदान करना।

7. वन संरक्षण व पुनर्स्थापना

पेड़ लगाने के अभियान, वन्यजीव सुरक्षा योजनाएँ व जैव विविधता का संरक्षण।

8. संस्कृति एवं विरासत का संरक्षण

पारंपरिक रीति-रिवाज़, त्योहार व भाषा को संजोए रखना व नई पीढ़ी में प्रसारित करना।