हमारे बारे में

Vision (दृष्टि)

दिवासी समाज के सर्वांगीण विकास, सांस्कृतिक संरक्षण और सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण के माध्यम से एक समान और सम्मानजनक स्थान स्थापित करना

Mission (मिशन)

आदिवासियों की शिक्षा, संस्कृति, भाषा और अधिकारों की रक्षा व प्रोत्साहन करना, साथ ही स्वास्थ्य, समाज कल्याण और आर्थिक अवसरों को बढ़ावा देकर आत्मनिर्भर और जागरूक समाज का निर्माण करना

समिति के उद्देश्य:

  1. आदिवासियों में पारस्परिक संपर्क और उनमें भाईचारे को बढ़ावा देना तथा सांस्कृतिक एवं सामाजिक संबंध स्थापित/विकसित करना।
  2. आदिवासियों की संस्कृति एवं भाषा के विकास, परिरक्षण एवं सुरक्षा के कार्य करना।
  3. आदिवासियों के आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक अधिकारों एवं हितों की वृद्धि और सुरक्षा के कार्य करना।
  4. आदिवासियों में शिक्षा, समाज कल्याण तथा स्वास्थ्य के लिए विभिन्न संस्थाओं की स्थापना, संचालन एवं प्रबंध करना।
  5. आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों और शासन से प्रदत्त सुविधाओं का उनके बीच प्रसार एवं प्रचार करना तथा ऐसे अधिकारों/सुविधाओं के लिए प्रयत्न करना।
  6. आदिवासियों के कल्याण के अन्य आवश्यक कार्य करना तथा इन सारे उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अन्य कार्य करना, धन जुटाना, उद्योग, व्यापार आदि संचालित करना।
  7. परिषद के कार्यकलाप तथा आदिवासियों के बीच विभिन्न महत्वपूर्ण मुद्दों की जानकारी पहुँचाने के लिए पत्र-पत्रिकाओं का प्रकाशन करना।
  8. ग्रामीण विकास, कृषि एवं कुटीर उद्योग आदि जैसी योजनाओं को आदिवासियों के कल्याण हेतु कार्यान्वित करना।
  9. आदिवासी महिला, युवक, बालक व बालिकाओं के विकास एवं कल्याण संबंधी कार्यक्रम संचालित करना।
  10. उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति हेतु अन्य ऐसा कार्य करना जो परिषद निश्चित करे।

नेतृत्व टीम

परिषद का नेतृत्व अनुभवी सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, राजनेताओं और आदिवासी समाज से जुड़े विद्वानों द्वारा किया जाता है। इसमें अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष और विभिन्न विभागों के प्रभारी शामिल होते हैं। प्रत्येक सदस्य का कार्यक्षेत्र अलग-अलग होता है – जैसे शिक्षा, संस्कृति, महिला सशक्तिकरण, कृषि, युवाओं का विकास आदि। टीम का उद्देश्य सामूहिक निर्णय लेकर योजनाओं को ज़मीनी स्तर तक पहुँचाना है।

उपलब्धिया और मील का पत्थर

आदिवासी शिक्षा प्रसार के लिए कई विद्यालय और छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू की गईं। आदिवासी कला, लोकनृत्य और संस्कृति को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाया।
महिला स्व-सहायता समूह (SHG) बनाकर आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया। वनाधिकार कानून (FRA) व पेसा एक्ट (PESA) के क्रियान्वयन में जनजागरूकता अभियान।
स्वास्थ्य शिविर, कौशल विकास प्रशिक्षण और उद्यमिता योजनाओं का संचालन। अनुसंधान आधारित रिपोर्टों के आधार पर सरकारी नीतियों में सुझाव शामिल कराए।

संगठनात्मक संरचना

केंद्रीय परिषद – नीति निर्माण और दिशा-निर्देशन। राज्य इकाईयाँ – राज्यस्तर पर कार्यक्रमों का संचालन। जिला समिति – स्थानीय स्तर पर क्रियान्वयन। ग्राम स्तरीय संगठन – सीधा जुड़ाव आदिवासी समुदाय से। प्रत्येक स्तर पर समन्वयक, सचिवालय और विशेष विभाग (शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कृति, युवा, महिला) बनाए गए हैं।