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आदिवासी पहचान का सवाल – अलग धर्म कोड जरूरी

मध्यप्रदेश सहित पूरे देश में आदिवासी समाज अपनी विशिष्ट पहचान, परंपराओं और संस्कृति के साथ सदियों से जीवन जीता आया है। उनकी प्रकृति-आधारित जीवनशैली, लोक आस्थाएं और सामाजिक व्यवस्था मुख्यधारा […]

77वें गणतंत्र दिवस पर आदिवासियों को उनके अधिकारों से समृद्ध करने की जरूरत

– उमंग सिंघार (मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष) 26 जनवरी 2026 को भारत 77वें गणतंत्र दिवस मना रहा है। यह दिन संविधान की सर्वोच्चता और लोकतांत्रिक मूल्यों का उत्सव है। […]

केंद्रीय बजट -2026 यानी अमीरों का उत्सव और आदिवासियों की उपेक्षा

केंद्र की भाजपा सरकार ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनका एजेंडा केवल बड़े उद्योगपतियों और कॉर्पोरेट घरानों को लूट का लाइसेंस देना है। यह बजट -2026 किसानों, […]

साल 2025 मध्यप्रदेश के आदिवासियों का संघर्ष से भरा साल

 उमंग सिंघार (नेता प्रतिपक्ष, मध्यप्रदेश विधानसभा) साल 2025 मध्यप्रदेश के आदिवासी समाज को कई कड़वे अनुभव और दुखद यादें देकर बीत गया। क्योंकि, प्रदेश के आदिवासियों के लिए यह साल […]

अधिकारों के नाम पर अन्याय : आदिवासी समाज के टूटते भरोसे मानव अधिकार दिवस और आदिवासी समाज

जय भीम जय जोहार | प्रशांत | मप्र आदिवासी विकास परिषद् भोपाल 10 दिसंबर, मानव अधिकार दिवस, देश और दुनिया में मनाया जाता है, लेकिन आदिवासी अंचलो में, सुदूर गावों […]

भारत की सबसे कम आबादी वाली जनजाति कौन सी है?

भारत की सबसे कम आबादी वाली और सबसे अनसुनी जनजातियों में से एक कोरवा जनजाति है। कोरवा सिर्फ एक जनजाति नहीं, बल्कि भारत की जीवित सांस्कृतिक विरासत हैं, जो आज […]

जनजातीय गौरव दिवस 2025: बिरसा मुंडा और आदिवासी संघर्ष की अमर विरासत

परिचय 15 नवंबर 2025 | पढ़ने का समय: 10–12 मिनट भारत का इतिहास आदिवासी समुदायों के साहस, संघर्ष और संस्कृति से गहराई से जुड़ा हुआ है। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान […]

डेढ़ दशक बाद भी अधूरी है “जमुना देवी बुआ जी” की विरासत

उमंग सिंघार आज कांग्रेस की आदिवासी नेत्री श्रीमती जमुना देवी जी यानी हमारी ‘बुआ जी’ को हमसे बिछड़े पूरे 15 साल हो गए। इन डेढ़ दशक में कांग्रेस और आदिवासी […]